आज ही भेजी गई थी अर्ज़ पर परियाँ आज तो है आप का भी 'बर्थडे' है ना? © Sudhakar' Salim '
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'ग़ालिब' न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़ ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर
Mirza Ghalib
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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़' दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे
Ahmad Faraz
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जो बर्थडे पे शॉल भी न दे सके मना रहे वो बरसी धूम धाम से
Irshad Siddique "Shibu"
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इक बर्फ़ सी जमी रहे दीवार-ओ-बाम पर इक आग मेरे कमरे के अंदर लगी रहे
Salim Saleem
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अगर हो नींद में वो जब तो परियाँ मुस्कुराती हैं उठे तो फिर चमन खिलता है कलियाँ मुस्कुराती है निकल जाए जहाँ से वो बिखर जाती है ख़ुशबू सी चले नन्हें से क़दमों से तो गलियाँ मुस्कुराती हैं
Prashant Arahat
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ज़िंदगी के प्यारे और उस की ख़ुशी के सात दिन कुछ अलग ही लगते हैं ना ? फरवरी के सात दिन
BR SUDHAKAR
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शा'इरी और नौकरी है दोनों ही मेरी ज़रूरत इक है दिल भरने को और इक पेट भरने के लिए है
BR SUDHAKAR
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ये रोब तू अब दोस्तों पे क्यूँ दिखाता है वो तुझ पे जब चिल्ला रही थी तब कहाँ था ये
BR SUDHAKAR
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चेहरा तेरा और उस पे हसीन ये आँखें जैसे चाँद पे रौशन दो दीए हो
BR SUDHAKAR
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नाच रहे सब सेे ये कह के फूल वो इन के पाज़ेब बनाती है
BR SUDHAKAR
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