अपने टूटे फूटे ख़्वाबों की ता'बीर बनाता हूँ मैं बिखरे लफ्ज़ों से काग़ज़ पर तस्वीर बनाता हूँ
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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अपने भी तुझ को अपनों में अब गिन नहीं रहे 'अफ़कार' मान जा कि तेरे दिन नहीं रहे
Afkar Alvi
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ख़्वाबों को आँखों से मिन्हा करती है नींद हमेशा मुझ सेे धोखा करती है उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वग़ैरा करती है
Tehzeeb Hafi
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खींची जो उस ने आँख में काजल की इक लकीर मैं ने भी अपने सीने पे इक हाथ रख लिया
Mukesh Jha
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कितना सुकून है तेरी बाहों में जान-ए-जाँ जी चाहता है मैं तुझे बाहों में बाँध लूँ
Aves Sayyad
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जितनी दुनिया बनाई है उस ने हम तो बिछड़े हर एक दुनिया में
Aves Sayyad
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अब तेरे आँसू बहाने से नहीं आएँगे हम मोहब्बत में बुलाने से नहीं आएँगे हम सेे मिलना है अगर तो यूँँ हिजाबों में न आ हम फ़क़त हाथ दिखाने से नहीं आएँगे
Aves Sayyad
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तेरे घर की खुली इन खिड़कियों में जा फँसे हैं घनी ज़ुल्फ़ों में तेरी हम उलझ कर रह गए हैं न कोई है हमारा, है न हम में हौसला फिर दुआ पर जाने किस की, उम्र अपनी जी रहे हैं
Aves Sayyad
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अब दिखाते हैं आइना मुझ को बेतहाशा रुलाने वाले लोग
Aves Sayyad
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