अपनी महरूमियाँ छिपाते हैं हम गरीबों की आन बान में क्या
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ख़ूब है इश्क़ का ये पहलू भी मैं भी बर्बाद हो गया तू भी
Jaun Elia
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अहद-ए-रफ़ाक़त ठीक है लेकिन मुझ को ऐसा लगता है तुम तो मेरे साथ रहोगी मैं तन्हा रह जाऊँगा
Jaun Elia
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ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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अपने सब यार काम कर रहे हैं और हम हैं कि नाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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ये तो बढ़ती ही चली जाती है मीआद-ए-सितम ज़ुज़ हरीफ़ान-ए-सितम किस को पुकारा जाए वक़्त ने एक ही नुक्ता तो किया है ता'लीम हाकिम-ए-वक़त को मसनद से उतारा जाए
Jaun Elia
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