दिल अगर ये मान जाए तो तुम्हारे घर चलें जो न कोई जान पाए तो तुम्हारे घर चलें वो हवा जो कर रही है रुख़ तुम्हारी याद का गर जिगर से पार जाए तो तुम्हारे घर चलें
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उस पैकर में शामिल है वो सब का सब जो जो लड़कों की कमज़ोरी होती है
Prakamyan Gautam
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उस के जैसों की होती है दुनिया हम जैसों का तो कमरा होता है
Prakamyan Gautam
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सारी दुनिया पीछे होती तुम गर हम को इज़्ज़त देते
Prakamyan Gautam
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पहले कर के पागल हम को अच्छा है ये पागल कहना
Prakamyan Gautam
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सपनों में देखा करते हैं तुम को और तो वरना फिर कोई ज़रिया नइँ
Prakamyan Gautam
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