हाए हैरत है ज़माने ने तुझे क्या समझा एक आदम से निकाली हुई हव्वा समझा सब समझते हैं तुझे बिंत-ए-फलाँ या ज़ोहजा फिर भी ईसा को ख़ुदा ने तेरा बेटा समझा
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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जो मेरे नाम से मंसूब कर के तोड़े थे वो फूल अब भी रखे हैं तेरी किताब में क्या मुझे यूँँ वहशतों की मौत मारने वाले बचा हुआ है मेरा अक्स तेरे ख़्वाब में क्या
ALI ZUHRI
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आप के तोड़े हुए फूल या छोड़े हुए लोग एक ही क़िस्म की बर्बादी यहाँ पाएँगे पहले पहले तो लुभाएँगे तुम्हें ख़ुशबू से धीरे धीरे वो किताबों में बिखर जाएँगे
ALI ZUHRI
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देख कर हुस्न तिरा चाँद बहक जाता है लड़खड़ाता हुआ अंबर से ढलक जाता है
ALI ZUHRI
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तुम एक शख़्स पे जीवन बिताते हो हद है किसी के प्यार में ख़ुद को भुलाते हो हद है तुम्हारी राह से कंकर चुने थे मैंनें दोस्त मुझे ही राह का पत्थर बताते हो हद है
ALI ZUHRI
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तुम जो दीवानों को आवारा बता देते हो तुम तो मेआ'र मोहब्बत का गिरा देते हो तुम को आता है नए लोगों में घुलना मिलना बा'द हिजरत के नया शहर बसा देते हो
ALI ZUHRI
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