हमीं तक रह गया क़िस्सा हमारा किसी ने ख़त नहीं खोला हमारा मुआ'फ़ी और इतनी सी ख़ता पर सज़ा से काम चल जाता हमारा
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रूठा था मैं बहुत दिनों से मान गया लेकिन कान पकड़ कर जब वो बोली सोरी-वोरी सब
Sandeep Thakur
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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कौन था वो जिस ने ये हाल किया है मेरा किस को इतनी आसानी से हासिल था मैं
Shariq Kaifi
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उस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझ को अब कुछ भी समझा लेती है दुनिया मुझ को
Shariq Kaifi
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कौन कह सकता है उस को देख कर ये वही है जो हमारा था कभी
Shariq Kaifi
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पिछली बेंच का बच्चा है दिल इस को हाथ उठाने देना
Shariq Kaifi
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बैठ कर बात की और जुदा हो गए कोई शिकवा नहीं कोई झगड़ा नहीं
Shariq Kaifi
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