हम से कहती रहती है शादी का और आशिक़ ग़ैरों को बताती है दफ़्तर से वापिस जल्दी आता हूँ बिन मेरे माँ खाना न खाती है
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सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
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इस तअल्लुक़ में नहीं मुमकिन तलाक़ ये मोहब्बत है कोई शादी नहीं
Anwar Shaoor
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उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
Prof. Rehman Musawwir
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मंज़िलें आती जाती रहती हैं किस लिए राह में रुका जाए
Madan Mohan Danish
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चलता रहने दो मियाँ सिलसिला दिलदारी का आशिक़ी दीन नहीं है कि मुकम्मल हो जाए
Abbas Tabish
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ये हँसने गाने वाले लोग तस्वीरों में रह जाऍंगे
Rohan Hamirpuriya
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सब बाहों में झूल चुकी है वो तुझ को कब का भूल चुकी है वो
Rohan Hamirpuriya
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थोड़ा सा जो मैं शातिर हूँ सिर्फ़ तुम्हारी ख़ातिर हूँ
Rohan Hamirpuriya
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गर्मी दिल्ली की सह नहीं पाते बात करते हैं साथ रहने की
Rohan Hamirpuriya
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ये रब्त कब मिटे है यूँँ मिटाने से ये आग है जो बढ़ती है बुझाने से
Rohan Hamirpuriya
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