हम यहीं दूद क़ज़ा पे ग़ाफ़िल और सब होंगे कता अख़्तर में
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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इश्क़ में ये दावा तो नईं है मैं ही अव्वल आऊँगा लेकिन इतना कह सकता हूँ अच्छे नंबर लाऊँगा
Zubair Ali Tabish
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगानी हुई अदा ऐसे पीठ-पीछे यक़ीं नहीं थे हम मुफ़्लिसी सब उड़ा गई मंज़िल यार हासिल कहीं नहीं थे हम
Kunu
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दर्द भी गुल बदन हुआ उस पे इस क़दर है निहाल इक लड़की
Kunu
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नारसा मर्द फ़ज़ा तक क़ाबिल बारहा रात कटा पत्थर में
Kunu
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नीमजाँ तक छुटा नहीं दामन वो रही गुल-बदन क़ज़ा कामिल
Kunu
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सब जुनूँ बूद सक़ाफ़त तक ही कुछ नहीं नाज़ वफ़ा वहशत में
Kunu
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