ज़िंदगानी हुई अदा ऐसे पीठ-पीछे यक़ीं नहीं थे हम मुफ़्लिसी सब उड़ा गई मंज़िल यार हासिल कहीं नहीं थे हम
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तुम ने भी उन से ही मिलना होता है जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है
Zia Mazkoor
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मिलना हमारा कम हुआ फिर बात कम हुई क़िस्तों में मुझ ग़रीब की ख़ैरात कम हुई
Bhawana Srivastava
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चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है
Munawwar Rana
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है
Bashir Badr
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दर्द भी गुल बदन हुआ उस पे इस क़दर है निहाल इक लड़की
Kunu
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नाज़ है यूँँ अजीब कहलाऊॅं यार अपना रक़ीब कहलाऊॅं थूक दूँ कुछ यहाँ वहाँ वहशत और मैं भी अदीब कहलाऊॅं
Kunu
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नीमजाँ तक छुटा नहीं दामन वो रही गुल-बदन क़ज़ा कामिल
Kunu
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सब जुनूँ बूद सक़ाफ़त तक ही कुछ नहीं नाज़ वफ़ा वहशत में
Kunu
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हम यहीं दूद क़ज़ा पे ग़ाफ़िल और सब होंगे कता अख़्तर में
Kunu
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