ek zamana tha ki sab ek jagah rahte the aur ab koi kahin koi kahin rahta hai
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
325 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Ahmad Mushtaq
यार सब जम्अ' हुए रात की ख़ामोशी में कोई रो कर तो कोई बाल बना कर आया
Ahmad Mushtaq
22 likes
ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इस में डूब जाएँ
Ahmad Mushtaq
34 likes
रोज़ मिलने पे भी लगता था कि जुग बीत गए इश्क़ में वक़्त का एहसास नहीं रहता है
Ahmad Mushtaq
24 likes
हम अपनी धूप में बैठे हैं 'मुश्ताक़' हमारे साथ है साया हमारा
Ahmad Mushtaq
25 likes
नए दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है हम भी ऐसे ही थे जब आए थे वीराने में
Ahmad Mushtaq
48 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Ahmad Mushtaq.
Similar Moods
More moods that pair well with Ahmad Mushtaq's sher.







