इश्क़ है जाने क्या क्या सिखा देता है पहले लगता था पंखा हवा देता है दूसरे इश्क़ से हम ने समझा यही ज़ख़्म मरहम से ख़ुद ही मिला देता है
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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मौत आई तो डाँट खाएगी इतनी भी कोई देर करता है
Kuldeep Tripathi KD
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कल वो मुझ को छोड़ देगी और फिर मैं बता सकता नहीं परसों का दुख
Kuldeep Tripathi KD
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हुई ग़लती यही कह कर वो लहजा भूल जाते हैं चढ़ा लो सर जिन्हें अक्सर वो लहजा भूल जाते हैं दरख़्तों को दिया पानी बुझाई प्यास भी उन की मगर बरसात को पाकर वो लहजा भूल जाते हैं
Kuldeep Tripathi KD
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राखियाँ जब देखता हूँ सोचता हूँ इक बहन देता मगर देता ख़ुदा तू
Kuldeep Tripathi KD
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मौत का देखना है अब मंज़र फ़रवरी में गुलाब बेचूंगा
Kuldeep Tripathi KD
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