जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
Related Sher
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
267 likes
मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
64 likes
तेरे बग़ैर भी जी कर दिखा दिया मैं ने दुआएँ दे तुझे शाइ'र बना दिया मैं ने
Anjum Rehbar
58 likes
More from Sristi Singh
याद आती है तेरी रुस्वाई मौसमों की हसीन पुरवाई उन दिनों मुझ में तुम फ़क़त तुम थे आज मुझ में है बस ये तन्हाई
Sristi Singh
0 likes
वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
Sristi Singh
0 likes
सभी सौदागरों के ख़्वाब होते हैं हो दुख मेरे तराज़ू पे तो अच्छा है
Sristi Singh
0 likes
ख़मोशी चूमता है सुर्ख़ होंठों से सो उस के आने पे चुप्पी सजाई है
Sristi Singh
1 likes
निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
Sristi Singh
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sristi Singh.
Similar Moods
More moods that pair well with Sristi Singh's sher.







