याद आती है तेरी रुस्वाई मौसमों की हसीन पुरवाई उन दिनों मुझ में तुम फ़क़त तुम थे आज मुझ में है बस ये तन्हाई
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
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वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
Sristi Singh
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निगाहें चीख कर जो कुछ भी कहती हैं मिरे ही बीस सालों की कमाई है
Sristi Singh
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जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
Sristi Singh
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निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
Sristi Singh
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सभी सौदागरों के ख़्वाब होते हैं हो दुख मेरे तराज़ू पे तो अच्छा है
Sristi Singh
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