निगाहें चीख कर जो कुछ भी कहती हैं मिरे ही बीस सालों की कमाई है
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
Sristi Singh
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याद आती है तेरी रुस्वाई मौसमों की हसीन पुरवाई उन दिनों मुझ में तुम फ़क़त तुम थे आज मुझ में है बस ये तन्हाई
Sristi Singh
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निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
Sristi Singh
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जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
Sristi Singh
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सभी सौदागरों के ख़्वाब होते हैं हो दुख मेरे तराज़ू पे तो अच्छा है
Sristi Singh
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