निगाहों से कहना ये बच कर रहेंगी वो शाइ'र है और फिर समाँ ओढ़ती है
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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याद आती है तेरी रुस्वाई मौसमों की हसीन पुरवाई उन दिनों मुझ में तुम फ़क़त तुम थे आज मुझ में है बस ये तन्हाई
Sristi Singh
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वफ़ा में आग लग जाए तो अच्छा है हँसी ग़मगीन करने से तो अच्छा है
Sristi Singh
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सभी सौदागरों के ख़्वाब होते हैं हो दुख मेरे तराज़ू पे तो अच्छा है
Sristi Singh
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ख़मोशी चूमता है सुर्ख़ होंठों से सो उस के आने पे चुप्पी सजाई है
Sristi Singh
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जब मुसलसल दुखों का समुंदर बहे ग़ैर को दुख बताना तभी चाहिए
Sristi Singh
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