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जब पाँव में पायल खनकती है समुद्री फिर तभी पूरे धरा-पाताल को हम ने चहकते देखा है

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

Abrar Kashif

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

Tehzeeb Hafi

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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

Allama Iqbal

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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था

Farrukh Yar

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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

Jawwad Sheikh

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More from Divya 'Kumar Sahab'

तुम तो कहते थे कि मैं रोता नहीं हूँ कब से इतना मुस्कुराया जा रहा है

Divya 'Kumar Sahab'

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यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता

Divya 'Kumar Sahab'

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दूर थे दोनों कहीं पर दोनों थे छत पर खड़े चाँद को छलनी बना कर देखा फिर उस ने मुझे

Divya 'Kumar Sahab'

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आज उतरे हैं होली में बवाल ले कर वो बस सफ़ेद कुर्ती में रंग लाल ले कर वो गाल कर रहे थे बस इंतिज़ार उन का ही मिलने आ गए ख़्वाबों में ग़ुलाल ले कर वो

Divya 'Kumar Sahab'

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लोग यहाँ पर आएँगे तो रंग लगाने मुझ को फिर भी शायद रंगों में लिपटा इक हाथ तुम्हार हो सकता था दो बच्चों ने मल मल कर जब रंग लगाया इक दूजे को दोस्त यही लगता है ऐसा साथ हमारा हो सकता था

Divya 'Kumar Sahab'

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