जब उस ने कुछ माँगा है तो देना ही है फिर महँगे सस्ते पर मियाँ कैसा सवाल?
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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तू ने ही तो चाहा था के मैं तेरा बनके रहूँ बस मैं ने सो तेरी ख़ुशी के वास्ते हर शय भुला दी
karan singh rajput
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तुझे आबाद रहने की दुआ दे के मेरे हालात पर रोता रहा मैं
karan singh rajput
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तुझ सेे लड़ते-लड़ते आख़िर इस जहाँ तक आ गए देख तेरी आरज़ू में हम कहाँ तक आ गए
karan singh rajput
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ये तो बस मेरा मुक़द्दर नईं सही वरना कोई ऐब नईं “दीवानी“ में
karan singh rajput
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माना उस के हाल पर उस को मैं यूँँही छोड़ आया ये नहीं लेकिन कि रिश्ता ही मैं उस सेे तोड़ आया वो कहीं पर तो मिलेगा मुझ सेे, इतना तो यक़ीं है इस लिए कल ख़ुद को रस्ते पर कहीं मैं छोड़ आया
karan singh rajput
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