झूठ कहते आदमी को क्या पता है बे-वफ़ाई सूँघ सकती है इक औरत
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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कोई समुंदर, कोई नदी होती कोई दरिया होता हम जितने प्यासे थे हमारा एक गिलास से क्या होता ता'ने देने से और हम पे शक करने से बेहतर था गले लगा के तुम ने हिजरत का दुख बाट लिया होता
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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कीर्ति तेरे तजुर्बों के आगे भी है दुनिया दारी अच्छा कोई मर्द मिले तो हाथ बढ़ाया कर आगे
Shayra kirti
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एक क़सम है उस की उस को फ़ोन नहीं करना एक मुसीबत ये वो नंबर भूल नहीं पाते
Shayra kirti
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ये ख़ुशी भी छीन ली इस कमबख़त कोरोना ने देखते ही दौड़कर उन के गले लग जाते थे
Shayra kirti
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ये भी इक तरक़ीब नई बाज़ार में है अब पिछली को रोया अगली दीवानी करली
Shayra kirti
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तुम्हारे साथ बारिश की कोई यादें नहीं फिर भी कभी जब होती है बारिश क्यूँ रोना फूट पड़ता है
Shayra kirti
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