जिन झूटे सच्चे ख़्वाबों की ता'बीर ग़म-ए-तन्हाई है उन झूटे सच्चे ख़्वाबों से तुम कब तक दिल बहलाओगे
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हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है
Pratap Somvanshi
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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जिन के होंटों पे हँसी पाँव में छाले होंगे हाँ वही लोग तुम्हें चाहने वाले होंगे
Parwaz Jalandhari
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जिन्हें सब लोग गूँगा बोलते हैं मेरे आगे वो ऊँचा बोलते हैं ख़मोशी बोलने वालों की सफ़ में हमीं सब सेे ज़ियादा बोलते हैं
Ashutosh Vdyarthi
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जिन से उठता नहीं कली का बोझ उन के कंधों पे ज़िन्दगी का बोझ वक़्त जब हाथ में नहीं रहता किस लिए हाथ पर घड़ी का बोझ
Vikram Sharma
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एक तेरा ही तबस्सुम तो न था वजह-ए-सुकूँ मेरे आँसू भी मोहब्बत में बहुत काम आए
Mushfiq Khwaja
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हम को इक उम्र न जीने का सलीक़ा आया हम ने इक उम्र तमन्नाओं के धोके खाए
Mushfiq Khwaja
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दिल एक और हज़ार आज़माइशें ग़म की दिया जला तो था लेकिन हवा की ज़द पर था
Mushfiq Khwaja
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ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहने की ख़्वाहिश का हासिल है कि लहजा लहजा अपने आप ही में मर रहा हूँ मैं
Mushfiq Khwaja
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