ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहने की ख़्वाहिश का हासिल है कि लहजा लहजा अपने आप ही में मर रहा हूँ मैं
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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कैसे किसी की याद हमें ज़िंदा रखती है एक ख़याल सहारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
Kaifi Azmi
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दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
Kaleem Aajiz
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एक तेरा ही तबस्सुम तो न था वजह-ए-सुकूँ मेरे आँसू भी मोहब्बत में बहुत काम आए
Mushfiq Khwaja
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दिल एक और हज़ार आज़माइशें ग़म की दिया जला तो था लेकिन हवा की ज़द पर था
Mushfiq Khwaja
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जिन झूटे सच्चे ख़्वाबों की ता'बीर ग़म-ए-तन्हाई है उन झूटे सच्चे ख़्वाबों से तुम कब तक दिल बहलाओगे
Mushfiq Khwaja
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हम को इक उम्र न जीने का सलीक़ा आया हम ने इक उम्र तमन्नाओं के धोके खाए
Mushfiq Khwaja
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