हम को इक उम्र न जीने का सलीक़ा आया हम ने इक उम्र तमन्नाओं के धोके खाए
Related Sher
क्या हुआ जो मुझे हम-उम्र मोहब्बत न मिली मेरी ख़्वाहिश भी यही थी कि बड़ी आग लगे
Muzdum Khan
62 likes
इशारा कर रहे हैं बाल ये बिखरे हुए क्या तू मेरे पास आया है कहीं होते हुए क्या ये इतना हँसने वाले इश्क़ में टूटे हुए लोग तू इन से पूछना अंदर से भी अच्छे हुए क्या
Kushal Dauneria
62 likes
दिल ये करता है कि इस उम्र की पगडंडी पर उलटे पैरों से चलूँ फिर वही लड़का हो जाऊँ
Mehshar Afridi
63 likes
आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा
Khursheed Rizvi
61 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
More from Mushfiq Khwaja
एक तेरा ही तबस्सुम तो न था वजह-ए-सुकूँ मेरे आँसू भी मोहब्बत में बहुत काम आए
Mushfiq Khwaja
4 likes
दिल एक और हज़ार आज़माइशें ग़म की दिया जला तो था लेकिन हवा की ज़द पर था
Mushfiq Khwaja
5 likes
ये लम्हा लम्हा ज़िंदा रहने की ख़्वाहिश का हासिल है कि लहजा लहजा अपने आप ही में मर रहा हूँ मैं
Mushfiq Khwaja
11 likes
जिन झूटे सच्चे ख़्वाबों की ता'बीर ग़म-ए-तन्हाई है उन झूटे सच्चे ख़्वाबों से तुम कब तक दिल बहलाओगे
Mushfiq Khwaja
11 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Mushfiq Khwaja.
Similar Moods
More moods that pair well with Mushfiq Khwaja's sher.







