जिस की ख़ातिर कितनी रातें सुलगाई जिस के दुख में दिल जाने क्यूँ रोता है इक दिन हम सेे पूछ रही थी वो लड़की प्यार में कोई पागल कैसे होता है
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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छुआ है तुम ने भी इक रोज़ हम को ये ख़ुशबू देर तक महका करेगी तुम्हारे हाथ सालों तक ये दुनिया हमारे नाम पे चूमा करेगी
Ritesh Rajwada
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है लग रहा है घुले हुए हो तुम
Ritesh Rajwada
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
Ritesh Rajwada
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रोज़ रोएँगे दिल जलाएँगे एक दिन थक के बैठ जाएँगे कौन हम को गले लगाता है हम किसे दास्ताँ सुनाएँगे
Ritesh Rajwada
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कहानी भी नहीं है दिल में कोई सो कुछ भी इन दिनों अच्छा नहीं है मैं अब उकता गया हूँ ज़िन्दगी से मेरा जी अब कहीं लगता नहीं है
Ritesh Rajwada
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