जुदाई इश्क़ का दस्तूर क्यूँँ है हम नहीं समझे मोहब्बत इस क़दर मजबूर क्यूँँ है हम नहीं समझे
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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दिल से साबित करो कि ज़िंदा हो साँस लेना कोई सुबूत नहीं
Fahmi Badayuni
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मेरे क़ुसूर वहाँ बात बात पर निकले वो कैसी बज़्म थी ग़द्दार मो'तबर निकले
Rekhta Pataulvi
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रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं बात करते हो आसमानों की
Rekhta Pataulvi
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मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
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सारे हुक़ूक़ छीन चुके मेरे घर के लोग अपने ही घर में रहता हूँ मेहमान की तरह
Rekhta Pataulvi
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हज़ारों आंधियाँ तूफ़ान आए और गए यारो चराग़-ए-रेख़्ता मद्धम सही पर अब भी जलता है
Rekhta Pataulvi
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