हज़ारों आंधियाँ तूफ़ान आए और गए यारो चराग़-ए-रेख़्ता मद्धम सही पर अब भी जलता है
Related Sher
कई क़िस्से अधूरे रह गए अपनी कहानी में चले आए हैं बचपन को गँवा के नौजवानी में हवाएँ जो बग़ावत पर उतर आई हैं आख़िर में किसी तूफ़ान की दस्तक है मेरी ज़िंदगानी में
nakul kumar
45 likes
चारागरी की बात किसी और से करो अब हो गए हैं यारो पुराने मरीज़ हम
Shuja Khawar
38 likes
उँगली पकड़ाओ इनको तो, हाथ मिलाने लगते हैं एक ग़ज़ल सुन लो तो ज़ालिम चार सुनाने लगते हैं इस जीवन में थोड़ी दिक़्क़त अच्छी होती है यारो ख़ाली सड़कों पर हम गाड़ी तेज़ चलाने लगते हैं
Tanoj Dadhich
43 likes
आओ मिल कर के सभी बैर मिटाएं यारो आओ हम आज की ये ईद मुबारक कर लें
Afzal Ali Afzal
24 likes
मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली उठो यारो भरो रंगों से झोली
Shaikh Zahuruddin Hatim
21 likes
More from Rekhta Pataulvi
मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
1 likes
महफ़िल में कौन आया है साग़र लिए हुए इक ख़ास कैफ़ियत का समुंदर लिए हुए
Rekhta Pataulvi
1 likes
इस भरी काइनात में या रब अपने रहने को एक घर भी नहीं पेड़ के नीचे जो गुज़र जाए ज़िन्दगी इतनी मुख़्तसर भी नहीं
Rekhta Pataulvi
1 likes
मेरे क़ुसूर वहाँ बात बात पर निकले वो कैसी बज़्म थी ग़द्दार मो'तबर निकले
Rekhta Pataulvi
1 likes
महफ़िल में कौन आया है सागर लिए हुए इक ख़ास कैफ़ियत का समुंदर लिए हुए
Rekhta Pataulvi
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Rekhta Pataulvi.
Similar Moods
More moods that pair well with Rekhta Pataulvi's sher.







