महफ़िल में कौन आया है साग़र लिए हुए इक ख़ास कैफ़ियत का समुंदर लिए हुए
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं बात करते हो आसमानों की
Rekhta Pataulvi
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मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
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जुदाई इश्क़ का दस्तूर क्यूँँ है हम नहीं समझे मोहब्बत इस क़दर मजबूर क्यूँँ है हम नहीं समझे
Rekhta Pataulvi
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महफ़िल में कौन आया है सागर लिए हुए इक ख़ास कैफ़ियत का समुंदर लिए हुए
Rekhta Pataulvi
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धोका खाने के हम आदी है किस क़दर अब के भी उन के धोके में हम आ गए
Rekhta Pataulvi
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