धोका खाने के हम आदी है किस क़दर अब के भी उन के धोके में हम आ गए
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
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इस भरी काइनात में या रब अपने रहने को एक घर भी नहीं पेड़ के नीचे जो गुज़र जाए ज़िन्दगी इतनी मुख़्तसर भी नहीं
Rekhta Pataulvi
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रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं बात करते हो आसमानों की
Rekhta Pataulvi
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किस ने भीगी हुई ज़ुल्फ़ों से ये झटका पानी पानी शर्माके हुआ जाता है पानी पानी
Rekhta Pataulvi
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जुदाई इश्क़ का दस्तूर क्यूँँ है हम नहीं समझे मोहब्बत इस क़दर मजबूर क्यूँँ है हम नहीं समझे
Rekhta Pataulvi
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