कभी कंघी कभी क्लीपे कभी सम्पू कभी साबुन अरे अब यार कितना ही यहाँ ख़र्चा उतर आया
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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मैं चाहता हूँ मोहब्बत मेरा वो हाल करे कि ख़्वाब में भी दोबारा कभी मजाल न हो
Jawwad Sheikh
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
Ankita Singh
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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लो आज हम ने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद लो अब कभी गिला न करेंगे किसी से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़माना देख लेगा कौन हैं हम वक़्त आने पर अभी ख़ुद को जलाऍंगे अभी ख़ुद को तपाऍंगे अभी तो जा रहे हैं डूब कर के मात खाने को मगर इक रोज़ रौनक़ बनके हम भी लौट आऍंगे
Raunak Karn
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ज़ख़्म तो क़ीमती नेमत है तू ये माना कर ज़ख़्म सीने से लगाएगा तो छा जाएगा जब नहीं करता है कुछ तो है तू इतना आला ख़ुद को पागल जो बनाएगा तो छा जाएगा
Raunak Karn
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रही यार कोशिश यही हर समय बस न ख़ुद को दिलों में बिठा ही सके हम
Raunak Karn
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पहले तो उस ने प्यार जताया बहुत मगर फिर क्या हुआ कि छोड़ के जाना पड़ा उसे
Raunak Karn
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उसे हक़ अगर हाँ ख़ज़ाने की दे दी यही मान लो हक़ लुटाने की दे दी
Raunak Karn
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