भले ही जान-लेवा हो सियासत को ग़लत कहना मगर फिर भी ये सच ईमान वाले लोग कहते हैं
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी मेरी दे दो किसी और को अब न ताक़त है और हौसला भी नहीं
Amaan Pathan
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तुम्हें उस्ताद से मिलेगा जो न मिलेगा ग़ज़ल की बाबत में
Amaan Pathan
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कुछ किताबें हैं बस ताक़ पर और हर तरफ़ बिखरे यादों के साए
Amaan Pathan
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इन ख़ुश्क धड़कनों की शिफ़ा करते करते हम दरिया किनारे दिल ये कई बार रख चुके
Amaan Pathan
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वो शे'र जिस को सुन के लोग ग़म-ज़दा हुए वो शे'र तो लिखा था कोई चौथी क्लास में
Amaan Pathan
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