ख़्वाब ये जाने क्यूँ मुझ को शब आ गए प्यासे लब पर मिरे तेरे लब आ गए मैं तो मदहोश बाँहों में तेरी हुआ दिन मिरे या'नी अच्छे ही अब आ गए
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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तुम यक़ीं मत मशीन पर रखना पाँव अपने ज़मीन पर रखना वो ज़फ़र जाल में फँसाएगा तुम नज़र उस हसीन पर रखना
Zafar Siddqui
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वो बड़े ही सख़्त तेवर में दिखा है इश्क़ के भी आज फ़ेवर में दिखा है हो गई काफ़ूर चेहरे की कशिश भी हिज्र का ग़म उस के ज़ेवर में दिखा है
Zafar Siddqui
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मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन ईद ऐसी बहार लाई है
Zafar Siddqui
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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