कि शक्लें देख कर आगे निकल जाते हैं सब के सब कोई इक राह चलते को सवारी भी नहीं देता
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये तो बस मेरा मुक़द्दर नईं सही वरना कोई ऐब नईं “दीवानी“ में
karan singh rajput
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ये कैसा जादू तू ने कर दिया है मुझ पे मेरी जाँ? किसी को भी मैं देखूँ चेहरा तेरा याद आता है
karan singh rajput
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रात भर गिरते है आँसू आँख से तब कहीं जा कर सवेरा होता है
karan singh rajput
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माना उस के हाल पर उस को मैं यूँँही छोड़ आया ये नहीं लेकिन कि रिश्ता ही मैं उस सेे तोड़ आया वो कहीं पर तो मिलेगा मुझ सेे, इतना तो यक़ीं है इस लिए कल ख़ुद को रस्ते पर कहीं मैं छोड़ आया
karan singh rajput
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कमज़ोर ना जानो दिए को ऐं - हवाओं इस तरह ख़ामोश हैं तो क्या बग़ावत भी हो सकती है कभी
karan singh rajput
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