किसी को उस नज़र से देखना भी इक ख़ता माना जुनून-ए-इश्क़ में महबूब को हम ने ख़ुदा माना
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगी हर सबक़ सलीक़े से जाते जाते सिखाते जाती है
Raj Tiwari
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ज़िंदगी इक ख़ूब-सूरत हादिसा है शक्ल मिट्टी की घड़ी बहती हवा है आँसुओं से तुम सदा दो आएगा वो हाल-ए-दिल वो जानता है वो ख़ुदा है
Raj Tiwari
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न कश्ती पर न साहिल पर न ही दरिया पर आएगा अगर तू डूबा तो इल्ज़ाम तेरे ही सर आएगा
Raj Tiwari
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मुस्कुराता हुआ ये गुलशन-ए-आफ़ाक़ मिरा यहाँ हर शाम तेरी ख़ुशबू बिखर जाती है
Raj Tiwari
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मुस्कुराता हुआ इक चेहरा हमें याद आया शीशा देखा तो कोई अपना हमें याद आया
Raj Tiwari
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