लालपुर से दूर है काँके बहुत किस ने कहा झाँक लीजे दिल में मेरे दोनों कितने पास हैं
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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खिल गए हैं रंग मुझ पे सारे ही जब लगा इक रंग तुम सेे, लाजवाब
Sanskriti Shree
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हम किनारों की तरह हैं इश्क़ में जाने वफ़ा एक हो सकते नहीं बस दोनों रहते पास हैं
Sanskriti Shree
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ज़िन्दगी के मसअलों पर मुस्कुरा या'नी अपने सब ग़मों पर मुस्कुरा गर जो चाहा वो न तुझ को मिल सके अपनी घटती ख़्वाहिशों पर मुस्कुरा
Sanskriti Shree
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मेरी इक तस्वीर देखी तुम ने पल भर प्यार से और वो तस्वीर उस पल और प्यारी हो गई
Sanskriti Shree
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इस तमन्ना में गुज़र जाएगी मेरी ज़िन्दगी वो मुसाफ़िर इक न इक दिन लौट कर के आएगा
Sanskriti Shree
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