महबूब मुझ सेे कह रहा है चीखते रोते हुए अब क्यूँँ गले लगता नहीं तू सामने होते हुए मेरे जनाज़े पर मुझे मैं ने ही देखा है अभी इतने दिनों के बा'द गहरी नींद में सोते हुए
Related Sher
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
361 likes
प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
138 likes
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
135 likes
More from Nikhil Tiwari 'Nazeel'
ज़ुल्म के क़िस्से सुनाए जब कभी तफ़्सीर से ख़ून धीरे से उतर आया मिरी तस्वीर से मैं ज़मीं से यूँँ लिपट कर रो नहीं सकता फ़क़त आसमाँ ने बाँध रक्खा है मुझे ज़ंजीर से
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
0 likes
ये कि मेरा आसमाँ जो आ गया नज़र तुम्हें बारिशें सिखा रही हैं इक नया हुनर तुम्हें
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
0 likes
फिर रोज़ की तरह का वही ग़म समेटना ऊपर से इस शराब से उक्ता गया था मैं
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
0 likes
लिखित में हमारी गवाही लगेगी लिखा है 'लहू की सियाही लगेगी' किसी की ग़रज़ हो तो आ कर बचा ले वगरना नदामत तबाही लगेगी
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
0 likes
यूँँ तख़्त-गाह से रब का तबादला देखा इसी बिना पे फ़रिश्तों में फ़ासला देखा
Nikhil Tiwari 'Nazeel'
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nikhil Tiwari 'Nazeel'.
Similar Moods
More moods that pair well with Nikhil Tiwari 'Nazeel''s sher.







