न जाने पढ़ाया यही मीडिया ने इसी देश को तो लड़ा हम रहे हैं
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँँ हैं
Rahat Indori
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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जाने क्या कुछ कर बैठा है बहुत दिनों से घर बैठा है वो मधुमास लिखे भी कैसे शाखों पर पतझर बैठा है
Vigyan Vrat
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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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ज़मीं भी सूख जाती है हमारे ही दिलों की यूँँ हमें देखे तरस तो फिर तरस को भी तरस आए
Raunak Karn
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रौनक फ़लकी होकर हम चाँद गगन पे आए है सच अब किस सेे बोले हम जान लुटाने आए है
Raunak Karn
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रिश्ता अदबी रखते थे यार उसी के दिल से हम अब हर ग़लती अपने ही हाथ मिटाने आए हैं
Raunak Karn
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कभी दिल भी कभी घर भी कभी ख़ंजर बदलता है वही तो यार मेरा था वही मंज़र बदलता है हमें सिखला रहा है वो अरे अब प्यार की बातें वही जो दो दिनों में ही सभी दिलबर बदलता है
Raunak Karn
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लूट कर हम को दिया इस शा'इरी का जो हुनर लिख ग़ज़ल कितने दिलों में नाम ये करवा गई
Raunak Karn
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