लूट कर हम को दिया इस शा'इरी का जो हुनर लिख ग़ज़ल कितने दिलों में नाम ये करवा गई
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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आप की आँखें अगर शे'र सुनाने लग जाएँ हम जो ग़ज़लें लिए फिरते हैं, ठिकाने लग जाएँ
Rehman Faris
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
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लिख के उँगली से धूल पे कोई ख़ुद हँसा अपनी भूल पे कोई याद कर के किसी के चेहरे को रख गया होंठ फूल पे कोई
Sandeep Thakur
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किताब फ़िल्म सफ़र इश्क़ शा'इरी औरत कहाँ कहाँ न गया ख़ुद को ढूँढ़ता हुआ मैं
Jawwad Sheikh
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ज़ख़्म तो क़ीमती नेमत है तू ये माना कर ज़ख़्म सीने से लगाएगा तो छा जाएगा जब नहीं करता है कुछ तो है तू इतना आला ख़ुद को पागल जो बनाएगा तो छा जाएगा
Raunak Karn
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नहीं है जो दिल ने 'रौनक' सब कहा अब तक न जाने कैसे लब पे वो बात आई है
Raunak Karn
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न जाने पढ़ाया यही मीडिया ने इसी देश को तो लड़ा हम रहे हैं
Raunak Karn
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हमारा दर्द भी कुछ यूँँ उभरता है ग़ज़ल बनके क़लम से अब उतरता है
Raunak Karn
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डर न होता छोड़ देते हाथ से दिल तोड़ देते ज़हर देकर जा रहा था मौत को भी मोड़ देते
Raunak Karn
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