नवंबर दो, दिया था हिज्र का तोहफ़ा उसी तारीख़ को मातम मनाता हूँ
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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क्या बोला मुझे ख़ुद को तुम्हारा नहीं कहना ये बात कभी मुझ सेे दुबारा नहीं कहना ये हुक़्म भी उस जान से प्यारे ने दिया है कुछ भी हो मुझे जान से प्यारा नहीं कहना
Ali Zaryoun
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उस की जुल्फ़ें उदास हो जाए इस-क़दर रौशनी भी ठीक नहीं तुम ने नाराज़ होना छोड़ दिया इतनी नाराज़गी भी ठीक नहीं
Fahmi Badayuni
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उसी मक़ाम पे कल मुझ को देख कर तन्हा बहुत उदास हुए फूल बेचने वाले
Jamal Ehsani
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मुझ को बदन नसीब था पर रूह के बग़ैर उस ने दिया भी फूल तो ख़ुशबू निकाल कर
Ankit Maurya
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जंग या मुहब्बत में है अगर जो सब जायज़ क़त्ल करते हम उन का शा'इरी नहीं करते
Kuldeep Tripathi KD
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इश्क़ है जाने क्या क्या सिखा देता है पहले लगता था पंखा हवा देता है दूसरे इश्क़ से हम ने समझा यही ज़ख़्म मरहम से ख़ुद ही मिला देता है
Kuldeep Tripathi KD
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दिए हैं ज़ख़्म कितने ज़िन्दगी ने भी फ़क़त महबूब ही क़ातिल नहीं मेरा
Kuldeep Tripathi KD
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मोहब्बत ज़ुल्म करती है खिलौनों पर कि बच्चे इश्क़ में बर्बाद बैठे हैं
Kuldeep Tripathi KD
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मेरी ग़ज़लों मिरे शे'रों में होंगी ग़लतियाँ बेशक नहीं भेजा कोई मिसरा कभी उस्ताद को हम ने
Kuldeep Tripathi KD
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