pahle rag rag se meri khun nichoda us ne ab ye kahta hai ki rangat hi meri pili hai
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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रंग-ओ-रस की हवस और बस मसअला दस्तरस और बस यूँँ बुनी हैं रगें जिस्म की एक नस टस से मस और बस
Ammar Iqbal
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दुआ करो कि सलामत रहे मिरी हिम्मत ये इक चराग़ कई आँधियों पे भारी है
Waseem Barelvi
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हर शख़्स पर किया न करो इतना ए'तिमाद हर साया-दार शय को शजर मत कहा करो
Muzaffar Warsi
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कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुख़न ज़ुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है
Muzaffar Warsi
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वतन की रेत ज़रा एड़ियाँ रगड़ने दे मुझे यक़ीं है कि पानी यहीं से निकलेगा
Muzaffar Warsi
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ज़िंदगी तुझ से हर इक साँस पे समझौता करूँँ शौक़ जीने का है मुझ को मगर इतना भी नहीं
Muzaffar Warsi
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