पलटा दे तक़दीर हमारी आ कर माथा चूम हमारा
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से
Faheem Jogapuri
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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हालत जो हमारी है तुम्हारी तो नहीं है ऐसा है तो फिर ये कोई यारी तो नहीं है
Ali Zaryoun
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इक नज़ाकत से मुझे उस ने पागल बोला जब मैं ने चूम लिया प्यार से उस के लब को
Parwez Akhtar
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तू बुझा कर रख गया था जबसे इस दिल के चराग़ हम ने इस घर में नहीं की रौशनाई आज तक
Siddharth Saaz
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होंठ जो कहते है सब कुछ झूठ है आँख सच कहती है उस की बात सुन
Siddharth Saaz
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दिल-ए-सोज़ाँ को भी महका रहे हैं हमें जो ख़्वाब तेरे आ रहे हैं तेरे शैदाई पागल हो चुके हैं तिरी तस्वीर चू में जा रहे हैं
Siddharth Saaz
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कभी दरिया में जिन की कश्तियाँ थी वही अब साहिलों पे रो रहे हैं
Siddharth Saaz
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इन्हीं रस्तों पे हम तुझ सेे मिले थे इन्हीं रस्तों पे तुझ को खो रहे हैं
Siddharth Saaz
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