परों को खोल कर मस्ती में जब उड़ते हैं दीवाने उड़ानों से मुकम्मल आसमाँ पर राज करते हैं
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी से जंग चाहे ज़िंदगी भर ही चले जीते जी तो मेरी जाँ अब हार मानेंगे नहीं मुस्कुरा कर ही सहेंगे चाहे जितना दर्द हो मुस्कुराने से कदाचित् रार ठानेंगे नहीं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये कभी भी दग़ा नहीं करतीं चल किताबों से इश्क़ करते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये कह कर रूह ने छोड़ा बदन इक किसी का बोझ कोई क्यूँ उठाए
Ajeetendra Aazi Tamaam
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आदतन तुम अपनी बातों से फिरोगे था पता दिल है दिल का क्या करें बस इश्क़ की तामील की
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है जीने नहीं देती यादों की पुरवाई
Ajeetendra Aazi Tamaam
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