purane sal ki thithuri hui parchhaiyan simtin nae din ka naya suraj ufuq par uthta aata hai
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हिज्र में तुम ने केवल बाल बिगाड़े हैं हम ने जाने कितने साल बिगाड़े हैं
Anand Raj Singh
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इक साल गया इक साल नया है आने को पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को
Ibn E Insha
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सोचता हूँ कि उस की आख़िरी कॉल आख़िरी ही हुई तो क्या होगा
Fahmi Badayuni
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जँचने लगा है दर्द मुझे आप का दिया बर्बाद करने वाले ने ही आसरा दिया कल पहली बार लड़ने की हिम्मत नहीं हुई मुझ को किसी के प्यार ने बुजदिल बना दिया
Kushal Dauneria
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झेला है मैं ने तीन सौ पैंसठ दुखों का साल चाहो तो पिछले बारह महीनों से पूछ लो
Rehman Faris
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मक़तल-ए-शौक़ के आदाब निराले हैं बहुत दिल भी क़ातिल को दिया करते हैं सर से पहले
Ali Sardar Jafri
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ये तेरा गुलिस्ताँ तेरा चमन कब मेरी नवा के क़ाबिल है नग़्मा मिरा अपने दामन में आप अपना गुलिस्ताँ लाता है
Ali Sardar Jafri
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शिकायतें भी बहुत हैं हिकायतें भी बहुत मज़ा तो जब है कि यारों के रू-ब-रू कहिए
Ali Sardar Jafri
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परतव से जिस के आलम-ए-इम्काँ बहार है वो नौ-बहार-ए-नाज़ अभी रहगुज़र में है
Ali Sardar Jafri
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शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है
Ali Sardar Jafri
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