सबब तन्हाई का है वो मेरी कहती थी मुझ को जो किसी भी हाल में तुम को कभी तन्हा न छोडूंँगी
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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अब मैं सारे जहाँ में हूँ बदनाम अब भी तुम मुझ को जानती हो क्या
Jaun Elia
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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सुनहरे ख़्वाबों से जिस मकाँ को सजाया था हम ने मिल के बरसों हमारे ख़्वाबों के उस मकाँ को लगा दी है आग ख़ुद ही उस ने
Dipendra Singh 'Raaz'
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आए सही वो आए भले देर से यहाँ कितनी तो देर लगती है अजमेर से यहाँ
Dipendra Singh 'Raaz'
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वो मेरे ज़ेहन के कोने में दबा बैठा था उस को फिर बहर में डाला तो कहीं शे'र बना
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम को छूने के लिए तो जानाँ चाँद पानी में उतर जाता है
Dipendra Singh 'Raaz'
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