sarak kar aa gain zulfen jo in makhmur aankhon tak main ye samjha ki mai-khane pe badli chhai jati hai
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ न रह सका जहाँ विरानियाँ तो रह गईं तुम चले गए तो क्या कहानियाँ तो रह गईं
Khalil Ur Rehman Qamar
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई
Nushur Wahidi
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हज़ार शम्अ' फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए नज़र नहीं तो अँधेरा है आदमी के लिए
Nushur Wahidi
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बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए
Nushur Wahidi
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इक नज़र का फ़साना है दुनिया सौ कहानी है इक कहानी से
Nushur Wahidi
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हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए
Nushur Wahidi
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