शायद अगली इक कोशिश तक़दीर बदल दे ज़हर तो जब जी चाहे खाया जा सकता है
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ये सोच कर के वो खिड़की से झाँक ले शायद गली में खेलते बच्चे लड़ा दिए मैं ने
Unknown
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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एक मुसलसल कोशिश ये बतलाती है छैनी से पर्वत काटा जा सकता है
Divy Kamaldhwaj
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हमारी मर्ज़ी से अब क्या बदलने वाला है तुम्हारे कब्ज़े में वोटिंग मशीन है साहब
Varun Anand
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मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा तेरा वा'दा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा
Sahir Ludhianvi
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बिछड़ जाएँगे हम दोनों ज़मीं पर ये उस ने आसमाँ पर लिख दिया है
Siraj Faisal Khan
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ख़ौफ़ आता है अपने साए से हिज्र के किस मक़ाम पर हूँ मैं
Siraj Faisal Khan
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मैं संग-ए-मील था तो ये करना पड़ा मुझे ता-उम्र रास्ते में ठहरना पड़ा मुझे
Siraj Faisal Khan
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जहान वालों से कह दो यहाँ से हट जाएँ ख़ुदा के और मेरे दरमियाँ से हट जाएँ
Siraj Faisal Khan
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आज मेरी इक ग़ज़ल ने उस के होंटों को छुआ आज पहली बार अपनी शा'इरी अच्छी लगी
Siraj Faisal Khan
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