तेरी संगत का अफ़ज़ल असर है के वो मुस्कुराता है जब भी ख़फा़ रहता है
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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तेरी निगाह-ए-नाज़ से छूटे हुए दरख़्त मर जाएँ क्या करें बता सूखे हुए दरख़्त हैरत है पेड़ नीम के देने लगे हैं आम पगला गए हैं आप के चू में हुए दरख़्त
Varun Anand
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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वो खु़द भी कितना खा़ली है उसे बता दिया मैं ने के आज आईने को आईना दिखा दिया मैं ने
S M Afzal Imam
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हम ही विरसे में दिया करते हैं उन को ये ख़राबी वरना बच्चों को कहाँ आता है बातों को छुपाना
S M Afzal Imam
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आँसू जो उन के आँखों से निकल जाते हैं पत्थर दिल भी पल भर में ही पिघल जाते हैं ज़ख़्मी होने से मैं दिल को बचाऊँ कैसे वो मुस्काते हैं तो ख़ंजर चल जाते हैं
S M Afzal Imam
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न जाने कैसा रिश्ता है ये मेरा और अब्बू का मुझे तकलीफ़ होती है तो उन को ख़्वाब आते हैं
S M Afzal Imam
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परेशांँ लोग सारे हैं के क्यूँँ आदत में शामिल है तेरा अफ़ज़ल जहाँँ जाना वहीं मशहूर हो जाना
S M Afzal Imam
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