the chor mai-kade ke masjid ke rahne wale mai se bhara hua hai jo zarf hai wazu ka
sherKuch Alfaaz
Related Sher
तेरे बग़ैर ही अच्छे थे क्या मुसीबत है ये कैसा प्यार है हर दिन जताना पड़ता है
Mehshar Afridi
81 likes
बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
141 likes
फैले हैं क़तरे ओस के घर में रोया हूँ मन मसोस के घर में मैं ने पलकें बिछाई थीं लेकिन चाँद उतरा पड़ोस के घर में
Sandeep Thakur
79 likes
भरी बहार में इक शाख़ पर खिला है गुलाब कि जैसे तू ने हथेली पे गाल रक्खा है
Ahmad Faraz
79 likes
ख़ुशी से काँप रही थीं ये उँगलियाँ इतनी डिलीट हो गया इक शख़्स सेव करने में
Fahmi Badayuni
122 likes
More from Hafeez Jaunpuri
Similar Writers
Our suggestions based on Hafeez Jaunpuri.
Similar Moods
More moods that pair well with Hafeez Jaunpuri's sher.







