तिश्नगी अफ़सुर्दगी गुम-गश्तगी बेचारगी हासिल-ए-सहरा-नवर्दी हम ने पाया भी तो क्या
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रखते हैं मोबाइल में मोहब्बत की निशानी अब फूल किताबों में छुपाया नहीं करते
Meharban Amrohvi
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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था
Tehzeeb Hafi
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कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है
Kafeel Rana
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तुम सब समझ चुके हो नहीं राज़ ये कोई क्यूँ देखने लगे हैं तुम्हें तिश्नगी से हम
Amaan Pathan
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मैं ने ख़ुद को बहलाने की इक तरकीब लगाई है जो भी मुझ को न मिल पाया, उस को तक़दीर बताई है
BR SUDHAKAR
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कितने सैयारे ख़ला में घूमते इन पतंगों को उड़ाता कौन है
Dharmesh bashar
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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया
Dharmesh bashar
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कैसे बचता शिकस्तगी से बदन जलता रहता है तिश्नगी से बदन अब भी सहमा हुआ है कमरे में शब-ए-रफ़्ता की तीरगी से बदन
Dharmesh bashar
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यादें भी इंतिज़ार भी आहें भी दर्द भी फ़ैयाज़ है वो देखिए क्या क्या नहीं दिया
Dharmesh bashar
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मौत आई है नजात-ए-ग़म-ए-हस्ती देने जान दे दूँ तो मिरा हक़ भी अदा हो जाए
Dharmesh bashar
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