तुम्हारे नाम से अच्छा किसी लुग़त में कहीं बरा-ए-शेर हमें कोई क़ाफ़िया न मिला
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे
Tehzeeb Hafi
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तपते सहराओं में सब के सर पे आँचल हो गया उस ने ज़ुल्फ़ें खोल दीं और मसअला हल हो गया
Tehzeeb Hafi
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो
Shajar Abbas
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ज़ुल्म की मिल के क़मर ऐसे करेंगे ख़म सब दूर हो जाएँगे ये अपने वतन से ग़म सब ख़्वाब अज्दाद ने जो देखा है इक दिन उस की देखना ख़ून से ता'बीर लिखेंगे हम सब
Shajar Abbas
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ये आज अपने आप से मिल कर ख़बर हुई हम वाक़ई में हाल से बे हाल हैं 'शजर'
Shajar Abbas
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ये आफ़ताब-ओ-क़मर कहकशाँ ख़ुदा की क़सम तुम्हारे चेहरा-ए-अनवर से नूर लेते हैं
Shajar Abbas
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ये क्यूँ ज़रदार सारे देख कर करते नहीं हैं ग़म किसी के चश्म क्यूँ ये देख कर होते नहीं हैं नम ज़माना हो गया हम को जवानी ढलने वाली है लिबास-ए-मुफ़्लिसी बचपन से ओढ़े फिर रहे हैं हम
Shajar Abbas
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