उन आँखों पे शे'र कहे कैसे कोई जिन आँखों से बहता दरिया देखा है
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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ये अमीरी इश्क़ पर भारी हुई जब से सो लगा है जिस्म का बाज़ार कमरे में
Jitendra "jeet"
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उस को यार न कुछ भाता है जिस के हिस्से ग़म आता है आँखों को कोई समझाए रातों को सोया जाता है
Jitendra "jeet"
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ये ख़ुदा तू तो ये जानता है कितने तरसे हैं इक शख़्स को हम
Jitendra "jeet"
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सब को जीने का यूँँ ढब नहीं आएगा आना जब चाहिए तब नहीं आएगा व्यर्थ ही जाएगा राह तकना तेरा जो गया सो गया अब नहीं आएगा
Jitendra "jeet"
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हम महफ़िल में ज़ख़्म दिखाने आए हैं टूटे दिल का हाल सुनाने आए हैं
Jitendra "jeet"
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