us zulf pe phabti shab-e-dijur ki sujhi andhe ko andhere mein badi dur ki sujhi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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पता तो तब चला जब मुझ पे आया सब बड़ा दम होता है बाबा के काँधे में
Parul Singh "Noor"
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अपने सामान को बाँधे हुए इस सोच में हूँ जो कहीं के नहीं रहते वो कहाँ जाते हैं
Jawwad Sheikh
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जब से हुआ है कंधे से बस्ते का बोझ कम बढ़ते ही जा रहे हैं मेरी ज़िंदगी में ग़म
Ankit Maurya
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लब-ए-ख़याल से उस लब का जो लिया बोसा तो मुँह ही मुँह में अजब तरह का मज़ा आया
Jurat Qalandar Bakhsh
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सभी इन'आम नित पाते हैं ऐ शीरीं-दहन तुझ से कभू तू एक बोसे से हमारा मुँह भी मीठा कर
Jurat Qalandar Bakhsh
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रखे है लज़्ज़त-ए-बोसा से मुझ को गर महरूम तो अपने तू भी न होंटों तलक ज़बाँ पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया
Jurat Qalandar Bakhsh
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