उस ने सुनाके तर्क-ए-ताअल्लुक़ का फ़ैसला इक चलते फिरते जिस्म को बेजान कर दिया
Related Sher
उस के पहलू से लग के चलते हैं हम कहीं टालने से टलते हैं
Jaun Elia
112 likes
साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं
Bashir Badr
85 likes
हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है
Munawwar Rana
57 likes
बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
161 likes
लोग औरत को फ़क़त जिस्म समझ लेते हैं रुह भी होती है उस में ये कहाँ सोचते हैं
Sahir Ludhianvi
55 likes
More from Shajar Abbas
ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो
Shajar Abbas
0 likes
ज़ुल्म की मिल के क़मर ऐसे करेंगे ख़म सब दूर हो जाएँगे ये अपने वतन से ग़म सब ख़्वाब अज्दाद ने जो देखा है इक दिन उस की देखना ख़ून से ता'बीर लिखेंगे हम सब
Shajar Abbas
0 likes
वो मेरी चूम के पेशानी मुझ सेे कहने लगी 'शजर' तुम्हारा मेरा साथ बस यहीं तक था
Shajar Abbas
0 likes
ज़िंदगानी की लूटकर ख़ुशियाँ ज़ख़्म-ए-दिल मुझ को दे गया है कोई मेरी आँखों की वो था बीनाई मेरी बीनाई ले गया है कोई
Shajar Abbas
0 likes
ज़ीस्त जब मौत की आग़ोश में सो जाएगी हर हक़ीक़त मिरी इक वाक़िआ' हो जाएगी
Shajar Abbas
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Shajar Abbas.
Similar Moods
More moods that pair well with Shajar Abbas's sher.







